दुर्गराज - छत्रपती शिवाजीमहाराज
   

दुर्गराज
 
शिवाजीमहाराज ने दुर्ग शिवनेरी पर जन्म लिया और दूसरे दुर्ग रायगढ़ में अपना देह-त्यागा| उन्होंने इन दुर्गों को जीतने, बनवाने व सँवारने में अपनी संपूर्ण ऊर्जा लगाई| शिवाजीमहाराज के विचारों का संकलन करनेवाले रामचंद्रपंत ने आज्ञा-पत्र में लिखा है, "दुर्ग राज्य का आधार है| गढ़ और कोट राज्य को बनाते हैं| वे राज्य की धरोहर हैं| दुर्ग सेना की ताकत व समाज की उन्नति का कारण है|"

शिवाजीमहाराज का संबंध दुर्गों से जीवनपर्यंत रहा| ३०० से अधिक दुर्गों के प्रबंधन हेतु उन्होंने सूक्ष्म नीति-नियम बनाए| सच तो यह है कि दुर्गों से उन्हें अपार प्रेम था और दुर्ग भी उनकी उपस्थिति व स्वामित्व से प्रसन्न हो उठते थे| जीवन का ७० प्रतिशत भाग उन्होंने इन दुर्गों के साथ बिताया| अत: वे "दुर्गराज" भी हैं|

 
संदर्भिका : शिवाजी & सुराज - अनिल माधव दवे