शिवाजीमहाराज – एक महान योजनाकार
   

 

शिवाजीमहाराज  – एक महान योजनाकार

शिवाजीमहाराज न केवल उनकी बहादुरी, कूटनीति और युद्ध तकनीक के लिए जाने जाते थे, बल्कि  अपने प्रबंधन कौशल और विशेषत: एक कुशल योजनाकर के रूप में उनका नाम आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। यदि नियोजन और प्रबंधन के दृष्टि से देखा जाए तो उनका पूरा का पूरा जीवन ही एक उत्तम मिसाल बन सकता है| इस दृष्टिकोण से उनकी जीवनी बड़ी ही रोचक और दिलचस्प रही है। एक राजा के तौर पर वे केवल एक अच्छे सेना प्रमुख ही नहीं, अपितु एक राजनैतिक, एक दूरदर्शी, और आदर्श आचरण का उदाहरण रहे हैं | विशाल साहस, अथाह ज्ञान, दया, कृपालुता के साथ-साथ उत्कृष्ट नेतृत्व गुण, उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमता, निर्दोष नियोजन कौशल और विलक्षण संयोजन दृष्टि जैसे गुण शिवाजीमहाराज को एक असाधारण महानायक बनाते हैं ।

प्रबंधन की नींव नियोजन, आयोजन, निर्देशन, समन्वय और नियंत्रण जैसे बुनियादी कार्यों से रखी जाती है | चूंकि अन्य सभी कार्यों का उगम योजना कार्य से जुड़ा है, इसलिए इसे सभी प्रबंधकीय कार्यों में अधिक मौलिक माना गया है। पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नियोजन ही एक व्यवस्थापक की सहायता करता है इसीलिए तो शायद कहा जाता है कि 'अच्छी शुरुआत स्वयं ही आधी सफ़लता तय कर देती है' |

सुनिश्चित नियोजन के लिए वर्तमान एवं भविष्य में आवश्यक मानवी और भौतिक संसाधनों का उचित विचार तथा समन्वय होना बहुत जरुरी है क्योंकि किसी भी संगठन के लिए अन्य नीतियों, कार्यक्रमों, प्रक्रियाओं प्रासंगिक तत्वों के उत्पत्ति इसी नियोजन कार्य के माध्यम से होती है | शिवाजीमहाराज एक सक्षम प्रशासक, एक अच्छे प्रबंधक और एक महान योजनाकार थे | राष्ट्र निर्माण के लिए इन्हीं कारकों की उपयुक्तता को वे भली-भाँति समझते थे |

शिवाजीमहाराज कुशल प्रबंधनकर्ता थे | वे जानते थे कि अच्छा नियोजन तभी संभव हो सकता है जब पर्याप्त और समुचित जानकारी पास हो | समय से आगे की सोच रखने वाले शिवाजीमहाराज ने सूचना विभाग की आवश्यकता को पहचाना और भारी मात्र में मौद्रिक संसाधनों का व्यय करते हुए ऐसे विभाग की स्थापना की | इस विभाग के उच्च वेतनों पर और रखरखाव पर उन्होंने कभी कोई सीमा या रोक नहीं लगाई क्योंकि उन्हें इस विभाग से समय-समय पर सटीक जानकारी मिलती रहती | इसी जानकारी और सूचना का उपयोग वे अपने समकक्ष राजाओं के साथ मेल-मिलाप और बैठकों में करते और राज्य जे हित में अपनी कार्यनीति, राजनीति तथा रणनीति का नियोजन करते | शिवाजीमहाराज ने हमेशा ही अपने प्रत्येक सलाहकार की राय और सुझावों का सम्मान किया |

उनकी नियोजन कुशलता का सर्वोत्तम उदाहरण वह समय था जब उन्होंने १६७० के बाद दक्षिण भारत की तरफ कुच की | आगरा से वापस आने के बाद, शिवाजी ने अपनी स्थिति का विश्लेषण किया | आज  के प्रगतिशील युग में यह विश्लेषण सहज ही प्रबंधन क्षेत्र का विश्व प्रसिद्ध कूँजी शब्द - SWOT के तहत पारित हो सकता है | SWOT आपके व्यक्तिगत शक्तियों और कमजोरियों का विश्लेषण तो है ही मगर साथ ही नियोजन करते समय आगे चलकर आपके मार्ग पर आने वाले संभवित अवसरों और खतरों का भी पृथक्करण है | आधुनिक युग में यह SWOT विपणन क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण साधन है, परंतु अचरज की बात है की आज से साढ़े तीन सौ साल पहले शिवाजीमहाराज ने अपने नियोजन कार्य में इसका उपयोग किया था |

SWOT के अपने संस्करण के अनुसार, शिवाजीमहाराज ने अपनी राजधानी रायगढ़ पर स्थानांतरित कर दी, अपने अश्वदल की संख्या  बढ़ाकर १,२५,००० तक पहुँचाई और आक्रमक युद्धनीति को अपनाते हुए छापामार युद्धशैली का निर्माण किया | १६४४ से १६७० के दौरान लगातार युद्धों के बाद उनके पास केवल १८ ही क़िले बचे थे | लेकिन अपने निराले विश्लेषण शास्त्र से उन्होंने पहले सिंहगढ़ जीता, और जल्द ही दक्षिणी भारत पर आक्रमण किया और केवल ८ साल के समय में स्वराज को नई दिशाओं की ओर ले के गए | शिवाजीमहाराज की इस ऐतिहासिक बहादुरी के पीछे उनके दोषरहित नियोजन का बल था |

यहाँ तक ​​कि अफ़ज़लखान को चित करने में भी योजन-कुशलता का बड़ा हाथ था | शिवाजीमहाराज ने अफ़ज़लखान को खुले में आकर लड़ने के लिए मजबूर कर दिया | उन्होंने चतुराई से अफ़ज़ल के ३६,०००  सैनिकों को २ भागों में विभाजित होने में विवश कर दिया | अफ़ज़ल की शक्ति विभाजित हो गई | शिवाजीमहाराज ने अपने बारे में नकारात्मक ख़बरें फैलाकर अफ़ज़ल को गुमराह भी किया | उन्होंने अफ़ज़ल की सेना और अपनी सेना के लिए अलग-अलग संकेत भी तैयार किए, ताकि वे अफ़ज़लखान को भ्रमित कर सकें | उन्होंने सभी आसपास के सड़क मार्गों को अवरुद्ध कर दिया ताकि अफजल और उनकी सेना भाग न जाए |  इतनी बड़ी जीत बिना कुशल नियोजन के संभव ही नहीं थी |

आगरा से शिवाजीमहाराज का पलायन भी - जहाँ वे मिठाई और फलों की टोकरी में छुपकर नजरकैद से भागे थे, उनकी दूरदर्शी योजना और निष्पादन योग्यता का अद्भुत नमूना है | ध्यानपूर्वक अध्ययन किया जाए, तो उनका संपूर्ण जीवन ही नियोजनबद्धता के कई ऐसे पाठों की पेशकश होगी जिसे अंततः स्वराज के उनके सपने और संघर्ष की सफलता का मुख्य कारक कहा जा सकता है |

 

संदर्भ उदाहरण और उद्धरण : एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के प्रोफेसरों श्री सुमंत टेकाडे और सुश्री रिचा जोसेफ द्वारा छत्रपती शिवाजीमहाराज और आज की स्थानीय कंपनियों की मानव संसाधन प्रबंधन नीतियों के तुलनात्मक विश्लेषण का अभ्यासपत्र