शिवसृष्टि – एक प्रस्तावित महापरियोजना
   
शिवसृष्टि – एक प्रस्तावित महापरियोजना

 
महाराष्ट्र राज्य में कुल मिलाकर कुछ ३५० क़िले हैं जो आज भी चुपचाप इतिहास की रक्षा करने वाले सतर्क संतरियों के रूप में खड़े हैं | यह मराठा साम्राज्य की आखिरी कुछ यादगार स्मृतियाँ हैं जो आज के महाराष्ट्र को छत्रपति शिवाजी महाराज के युग से जोड़ती हैं |
इन्हीं क़िलों के बल पर शिवाजी महाराज ने स्वतंत्र मराठा साम्राज्य की स्थापना की थी | उस युग की राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार ऐसे रणनीतिक क़िलों पर कब्ज़ा ही सैन्य शक्ति की असली कुंजी थी | शिवाजी महाराज के “स्वराज” के सपने को प्रत्यक्ष रूप में परिवर्तित करने में इन क़िलों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है|
दुर्भाग्यवश इन ऐतिहासिक क़िलों में से किसी की भी वास्तविक महिमा आज के युग में प्रवर्तित नहीं हो पाई है | इस्लामी आक्रमणकारियों एवं अंग्रज़ों द्वारा विनाश के साथ-साथ बदलती परिस्थितियों और वर्षों की उपेक्षा तथा इस विरासत का प्रशासन द्वारा अपर्याप्त संवर्धन के चलते अब इन क़िलों की हालत पहले जैसी नहीं रही है| ऐतिहासिक स्थलों के लिए मौजूदा कानून के अनुसार ऐतिहासिक क़िलों की पूरी बहाली और पुनर्निर्माण की अनुमति नहीं है|
मराठा साम्राज्य की भव्यता और गौरव की आज बस कल्पना ही की जा सकती है मगर इस अनुभव को वास्तव में साध्य करने के हेतु से बाबासाहेब की अवधारणा से एक विराट धरोहर स्थल - “शिवसृष्टि” का निर्माण हो रहा है जो मराठा साम्राज्य की महिमा को बखूबी प्रतिबिंबित करेगा|
“शिवसृष्टि” की रचना, परंपरा और विरासत का पूरा ध्यान रखते हुए की जा रही है| इतिहास के पन्नों में विलीन स्थापत्य शास्त्र और वास्तु-कला का यह अभिनव प्रदर्शन, लोगों को एक अनोखी समय यात्रा का अनुभव देगा जो अपने आप में अभूतपूर्व होगा|
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