शिवसृष्टि - एक विराट सांस्कृतिक धरोहर स्थल
   
 

 
जिस प्रकार मनुष्य समय के पन्नों में अपने अतीत की स्मृतियों को खोजता है, उसी प्रकार इतिहास के पन्नों में भी समाज के निर्माण की कहानी छुपी होती है | इतिहास समय का का वह दर्पण है जो हमें हमारी वास्तव पहचान दिलाता है, हमें हमारे आज से मिलाता है और भविष्य के किवाड़ों को खोलने की चेष्टा करता है|
 
इतिहास के इन्हीं पन्नों में हमें मिलते हैं कुछ ऐसे क़िरदार, जिनका संपूर्ण जीवनचरित ही प्रेरणा से भरपूर अध्यायों का एक महान ग्रंथ बनता है| छत्रपति शिवाजी महाराज – भारत के इतिहास के एक ऐसे महान योद्धा, जिनकी रणनीति के साथ साथ उनकी दृष्टि, वीरता, गुण और ज्ञान के किस्से सदियों बाद भी आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत रहे हैं|
 
छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा प्रस्थापित मराठा साम्राज्य न्याय, शांति और सुरक्षा का पोषक था| हर नागरिक के स्वाभिमान और हर नारी के सम्मान की रक्षा करना मराठा साम्राज्य अपना प्रथम कर्तव्य मानता था| यहाँ राज्य- भक्ति या निष्ठा (वफ़ादारी) और वीरता या साहस(बहादुरी) का सदैव आदर और पुरस्कार हुआ|
 
अपने शासनकाल के साढ़े तीनसौ साल बाद, आज भी शिवाजी महाराज को एक राष्ट्रनायक के रूप में देखा जाता है| उनकी शासन और प्रबंधन शैली आज भी कितने ही प्रबंधन संस्थाओं (मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट्स) में अभ्यास का विषय है, उनके न्याय-नियमों को आज भी आदर्श मानकों का प्रतिरूप समझा जाता है और उनका व्यक्तिगत चरित्र आज भी राष्ट्र के नायक-नेताओं को अभिप्रेरित करने से नहीं चूकता| शिवाजी महाराज का जीवनकाल और उनका रोचक इतिहास भारत के आने वाली कई पीढ़ियों को एक सबल एवं सक्षम राष्ट्र निर्माण हेतु प्रोत्साहित करता रहेगा|
 
महाराजा शिवछत्रपति प्रतिष्ठान द्वारा प्रस्तावित “शिवसृष्टि”, छत्रपति शिवाजी महाराज की जीवनी के अभ्यास हेतु एक समर्पित महत्वाकांक्षी और समावेशक परियोजना है , जिससे कि उनके तेजस्वी इतिहास एवं प्रतापी जीवनयात्रा को रंजकता से समूचे विश्व में वर्तमान एवं आगामी पीढ़ियों तक पहुँचाया जा सके|
 
महाराजा शिवछत्रपति प्रतिष्ठान की स्थापना ७ अप्रैल १९६७ को महारानी छत्रपति राजमाता सुमित्रा भोसले के सक्षम नेतृत्व के तहत हुई थी | हालाँकि राजमाता माँ साहेब महाराज अब हमारे बीच नहीं रहीं, मगर उनके आशीर्वाद आज भी हमारे पथ प्रदर्शक हैं| शिवशाहीर श्री बाबासाहेब पुरंदरे की शिवाजी महाराज के जीवन के प्रति दृढ़ निष्ठा इस प्रतिष्ठान का आत्मबल रही है| आज हिंदुस्तान में शिवचरित्र की गाथा बिना बाबासाहेब पुरंदरे लिए पूरी ही नहीं हो सकती | पिछले आठ दशकों में अविरत रूप से बाबासाहेब पुरंदरे देश विदेश में शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास को पहुँचाने का काम कर रहे हैं – फिर चाहे इस लंबे समय में जगह-जगह किए गए बारह हज़ार से भी ज्यादा व्याख्यान हों या शिवजीवनी पर आधारित “जाणता राजा” महानाट्य हो या फिर सुप्रसिद्ध ग्रंथ “राजा शिवछत्रपति” या अब जीवन के शताब्दी वर्ष में पदार्पण करते हुए कई साल से संजोया हुआ सपना – “शिवसृष्टि”|
 
महाराजा शिवछत्रपति प्रतिष्ठान मराठा साम्राज्य की भव्यता और गौरव के अनुभव को वास्तव में साध्य करने के हेतु से एक विराट धरोहर स्थल - “शिवसृष्टि” का निर्माण कर रहा है जो मराठा साम्राज्य की महिमा को बखूबी प्रतिबिंबित करेगा| इसकी रचना में परंपरा और विरासत का पूरा ध्यान रखा जा रहा है | “शिवसृष्टि” भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में अपनी किस्म का एक अनोखा प्रकल्प होगा जिसका उद्देश्य सभी माध्यमों द्वारा शिवचरित्र का दर्शन एवं प्रदर्शन है | यह किसी “larger than life” थीम पार्क से कम नहीं परंतु प्रतिष्ठान की दृष्टि से यह भारत की आनेवाली पीढ़ियों के लिए एक संस्कार केंद्र बनेगा| आधुनिक तंत्रज्ञान के माध्यम से शिवाजी महाराज की वीरता, शौर्य, धैर्य एवं चातुर्य का दर्शन यहाँ विभिन्न प्रदर्शनियों द्वारा होगा| यह एक ऐसा ऐतिहासिक पर्यटन स्थल बनेगा जहाँ आप प्रत्यक्ष सत्रहवीं सदी का अनुभव ले सकेंगे| वास्तु, शिल्प, दुर्ग, यहाँ तक की परिधान करने के लिए वेशभूषा भी उसी ज़माने की होगी| पर्यटकों के विहार के लिए घोड़े, बैलगाड़ी, ऊँट और हाथियों की सवारी होगी| अभी पहले चरण में ३६००० स्क्वेअर फीट क्षेत्र में “सरकार वाडा” खड़ा हो चूका है और आगे रायगड़ राजसभा, भावनी माता मंदीर, रंगमंडल, तटबंदी, गंगासागर, माची, आरमार, शिल्प ग्राम, बाज़ार, अश्वशाला, आर्ट गैलेरी, म्यूजियम आदि की परियोजना का कार्यवहन भी हो रहा है | कुल मिलाकर २० एकड़ में बना या भव्य प्रकल्प अद्वितीय और अद्भुत होगा |
 
असंभव को संभव करना यही शिवाजी महाराज का आदर्श था जो बाबासाहेब ने बखूबी निभाया है | उनकी प्रेरणा से महाराजा शिवछत्रपति प्रतिष्ठान ने भी “शिवसृष्टि” नामक शिवधनुष्य उठाया है | “शिवसृष्टि” छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को देश के घर-घर में ले जानेका प्रयास है जिससे हम सभी इस महान अनुकरणीय शासक, सक्षम प्रशासक और दूरदर्शी व्यक्तित्व को और करीब से जान सकें और उनका अनुगमन कर सकें |
 
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