पुणे जागीर
   
 
 
शिवाजीराजे और जिजाऊसाहब को शहाजीराजे ने पुणे जागीर का प्रबंध देखने पुणे भेजा | इस समय राजे सात साल के थे | पुणे में मालोजीराजे की पहले कोठियाँ थीं | लेकिन आदिलशाही सेना ने इ. स. १६३० में पुणे को तहस-नहस कर डाला | और उसी वक्त पुणे में गधे का हल चलाया | सुन्दर पुणे शहर को भयावह शमशान घाट में तब्दील किया |
 
जिजाऊसाहब छोटे राजे को लेकर उजड़े पुणे में आई | पुणे में विनायक भट ठकार की हवेली में, ताक में गणेशजी बैठे थे | राजे और जिजाऊसाहब श्री गणेशजी के दर्शन करने वहाँ गए और यहीं से श्री गणेश हुआ पुननिर्माण के कार्य का | यहीं पर जिजाऊसाहब ने गणेशजी का मंदिर बनाने का आदेश दिया | और पुणे शहर को फिर से बसाने का निश्चय किया | 
संदर्भिका : महाराज – लेखक बाबासाहेब पुरंदरे, अनुवादक (मूल मराठी से) – सौ. सुनिता कट्टी